फ़ॉलोअर

शनिवार, 10 फ़रवरी 2018

#साहिल पर तो आये #रिश्तों की #कश्तियाँ ।

#साहिल पर तो आये #रिश्तों की #कश्तियाँ ।

यूँ ही अनजाने में जो कर बैठे हैं गुस्ताखियाँ ।
अब तो बढ़ चले हैं  फासले और रूसवाइयां ।
कुछ तो कम हो ये पल पल सताती दुशवारियाँ।
आओ तोड़े अब ये चुप्पी और खामोशियाँ ।
दूर करें ग़लतफ़हमी जो है तेरे मेरे दरमियान ।
न हो सकें सुलह ऐसी तो न होगी मजबूरियां ।
कुछ तुम तो कुछ हम बढ़ें छोड़कर गुमानियां ।
साहिल पर तो आये 'दीप ' ये रिश्तों की कश्तियाँ ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Clickhere to comment in hindi

कर दो दिल को आज़ाद, एहसान मानेंगे जनम सात .

  कर दो दिल को आज़ाद एहसान मानेंगे जनम   सात .   तुम आओ न मेरे दिल को याद एहसान मानेंगे जनम   सात .     कौन सी घडी थी और कौन से...