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गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019

अपने अंदर# के हुनर# को आजमाकर# तो देखें !



चलो एक कदम और बढाकर तो देखें ,
अपने अंदर के हुनर को आजमाकर तो देखें ।

माना कि खुद के अंदर कभी झाँका नहीं ,
स्वयं को पहचानने की रही जिज्ञासा नहीं,
प्रतिभा को अपनी  कभी आँका नहीं ,
क्षमता के अनुरूप खुद को तराशा नहीं।

करते  रहे औरों की सुनकर अब तक ,
मन की बात सुनने की न थी फुरसत ,
सफलता ने न दी द्वार पर दस्तक ,
बस दुनिया को कोसा किये अब तक ।

आसमाँ और भी है मन में रख हताशा नहीं ,
जहां चाह वहां राह है अब छोड़ अभिलाषा नहीं ।

निराशा की धूल "दीप" दर्पण से हटाकर तो देखें ,
संभावनाओं के समंदर में गोता लगाकर तो देखें ,
चलो एक कदम और बढाकर तो देखें ,
अपने अंदर के हुनर को आजमाकर तो देखें ।

कर दो दिल को आज़ाद, एहसान मानेंगे जनम सात .

  कर दो दिल को आज़ाद एहसान मानेंगे जनम   सात .   तुम आओ न मेरे दिल को याद एहसान मानेंगे जनम   सात .     कौन सी घडी थी और कौन से...